चंदेरी हथकरघा
जिला हाथकरघा कार्यालय एवं प्रशिक्षण केन्द्र चन्देरी जिला अशोकनगर (म0प्र0)
चन्देरी नगर ऐतिहासिक होने के साथ साथ आकर्षक कलात्मकता के साथ हाथकरघों द्वारा निर्मित चन्देरी साडीयों के लिये विश्व प्रसिध्द है चन्देरी वस्त्र निर्माण का इतिहास विगत 500 वर्षो से भी अधिक पुराना है 1350 ईसवी में लगभग 20 हजार बुनकर लखनोती, बंगाल (वर्तमान में ढाका) नामक स्थान से प्रवास कर चन्देरी आकर वसे। उनके द्वारा प्रथम बार मुस्लिन / मखमल का उत्पादन कार्य सुरू किया गया था। प्रारंभ में हाथकरघा उधोग में साफा, पगडी, लुगढा साडी, हाथी के होवे के पर्दे डालने के लिये आदि बनाये जाते थे। उक्त उत्पादित वस्त्र में हाथ से बुने हुये बारीक सूत का उपयोग किया जाता था। यहा के मुख्य वस्त्र धार, देवास, नागपुर और अमरावती अर्थात मराठा राज्य दरवारों में अत्याधिक लोकप्रिय थे। चन्देरी के कारिगारी भारत में ऐसे बुनकर थे जो 200 से लेकर 250 काउन्ट तक के बारीक सूत के धागों को उपयोग करते थे। चन्देरी में निर्मित पगढी 100 ग्राम से अधिक वजन की नही होती थी जिसकी लम्बाई लगभग 10 गज हुआ करती थी। बढौदा राज्य में इस प्रकार की पगढी साही परिधान का अंग होती थी। महाराज शिवाजी राव गायकवाड ने जीवन भर चन्देरी पगढी एवं कढाई वाली सूती चन्देरी धोती का उपयोग किया था। शाही वस्त्र निर्माण हेतु सोने एवं चन्देरी की जरी का उपयोग किया जाता था।
चन्देरी वस्त्र उधोग की वर्तमान स्थिति :-
वर्तमान में चन्देरी में लगभग 5500 हाथकरघा स्थापित है, जिस पर लगभग 7600 बुनकर कार्यरत होकर चन्देरी साडी/ वस्त्रों का निर्माण करते है। चन्देरी वस्त्र उधोग में लगभग 15000 लोग प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से संलग्न है। वर्तमान में चन्देरी साडी का वार्षिक व्यापार लगभग 300 करोड रूपये का है।
चन्देरी साडी का विवरण:-
चन्देरी साडी निर्माण में कच्चे माल के रूप में ताने में सिल्क एवं बाने में पूना सिल्क, मर्सराईज, जरी, सूत, कतान सिल्क आदि का उपयोग किया जाता है। चन्देरी में रेशम बेंगलोर एवं बनारस से तथा सूत (मर्सराईज) कोयंबटूर एवं जरी सूरत (गुजरात) से मंगायी जाती है।
चन्देरी साडी की विशेषताऐ:-
चन्देरी साडी हस्त निर्मित होने एवं अपने बारीक कार्य एवं पारदर्शिता तथा वजन में अत्यन्त हल्की होने के कारण विश्व प्रसिध्द है। चन्देरी साडी में बूटी एक प्रकार का डिजाईन है जिसका निर्माण हाथो द्वारा सुई की सहायता से किया जाता है। बूटी मुख्यत: जरी एवं मर्सराईज के द्वरा निर्मित की जाती है। बडे आकर की बूटी बूटा कहलाती है। हाथ से बनाई गई साडी को लम्बे समय तक उपयोग करने के बाद भी खराब नही होती है। बूटी के कई प्रकार है जैसे सिक्का बूटी, अर्शफी बूटी, पेड, पौधौ, पशु पक्षियों आदि के रूपांकनों का उपयोग मुख्यत: किया जाता है।
चन्देरी साडी उत्पादन के प्रमुख प्रकार :-
नालफेरमा साडी :- नालफेरमा साडी निर्माण में सींघ से निर्मित शटल का उपयोग किया जाता है यह साडी 02 व्यक्तियों के द्वारा संयुक्त रूप से बनाई जाती है यह एक विशिष्ट प्रकार का बोडर है जिसमें बोडर का ताना और साडी का बाकी हिस्सा दो अलग अलग धागो से बने होते है और बुनाई के दौरान उनके एक दूसरे के साथ बुना जाता है। साडी निर्माण में ताना – 20/22 डीनियर, बाना – शुध्द रेशम और जरी का उपयोग किया जाता है।
दोहरा अड्डा :- बेहद खुबसूरत नक्कासी बोडर, शुध्द रेशम के बेहद मनमोहक संयोजन में तैयार की जाती है। यह जीवन्त कन्ट्रास्ट का प्रभाव उत्पन्न करता है। साडी निर्माण में ताना – शुध्द रेशम, शुध्द रेशम का कपडा, बाना – शुध्द रेशम का उपयोग किया जाता है।
कन्ट्रास बोडर :-
यह एक लोकप्रिय साडी है, जो देखने मे बेहद सुन्दर लगती है, इसका बोडर शुध्द रेशम एवं बेस कतान से बना होता है। इसमे कई बूटियां होती है जो शुध्द जरी से बनाई जाती है। साडी निर्माण में ताना – शुध्द रेशम, बाना – शुध्द रेशम और जरी का उपयोग किया जाता है।
इकनलिया बूटी वर्क :-
यह एक अत्यन्त लोकप्रिय साडी है, साडी का डिजाईन सिंगल पिक पर बनाया जाता है जिससे बूटी उभरी हुई प्रतीत होती है। इसमें एक प्रकार से घनी बूटी का निर्माण होता है। साडी निर्माण में ताना – सिल्क 20/22 डेनियर, बाना – कॉटन 100 एस एक्सट्रा (बार्प / वेफ्ट) में जरी का उपयोग किया जाता है।
ऑल ओबर जाल :-
इस साडी मे पूरी साडी में डिजाईन निर्मित की जाती है जो कि जाली के समान प्रतीत होती है। इसे प्राय: जंगला साडी भी कहा जाता है। साडी निर्माण में ताना – शुध्द रेशम, बाना – रेशम / जरी का उपयोग किया जाता है।
अड्डा बोडर :-
इसमें मुख्यत: साडी के बोडर पर हेवी डिजाईनिंग की जाती है। जिससे कि बोडर में मुख्य साडी से बिलकुल अलग प्रतीत होता है। इसकी प्रमुख विशेषता बोडर पर की गई नक्कासी है। साडी निर्माण मे ताना – शुध्द रेशम, बाना – रेशम / मर्सराईज का उपयोग किया जाता है।
सोल्डर पल्लू :-
यह साडी सबसे साधारण रूप से निर्मित की जाती है साडी निर्माण में ताना – शुध्द रेशम, बाना – मर्सराईज का उपयोग किया जाता है।
मेंहदी रचे हाथ :-
यह साडी परम्परागत रूप से विगत वर्षो से बनाई जा रही है जिसमें बोडर में मेंहदी लगाते हुये हाथो का डिजाईन बनाया जाता है साडी निर्माण मे ताना – शुध्द रेशम, बाना – रेशम / रेशम / मर्सराईज का उपयोग किया जाता है।
अत: उपरोक्त सभी प्रकार की साडियॉ सभी प्रकार के बुनकरों द्वारा बनाई जाती है।