संस्कृति

अशोकनगर त्रिकाल  चौबीसी जैन मंदिर के लिये भारत में प्रसिद्व है, जहाँ कि भूत, भविष्य  एवं वर्तमान काल के 24 जैन तीर्थंकरों की  मूर्तियाँ  विराजमान है । जिला एक छोटे ऐतिहासिक शहर चंदेरी के लिये प्रसिद्व है, जो कि अशोकनगर से लगभग 60 कि.मी. दूर चंदेरी में प्राचीन मूर्तियाँ बडी संख्या में पायी जाती है । थूवोन जी जैनियों का एक और बहुत प्रसिद्व अतिशय क्षेत्र है, य‍ह अशोकनगर से लगभग 32 कि.मी. दूर है ।  दक्षिण में, अशोकनगर से 35 कि.मी. दूर  प्रसिद्व करीला माता मंदिर है, जो कि भगवान श्री राम एवं माता  सीता  के दो पुत्रों  लव और कुश के जन्म स्थान के लिये जाना जाता है, यहाँ  पर एक विशाल मेला हर साल रंगपंचमी पर आयोजित किया जाता है, जिसमें राई नृत्य बेडनी महिलाओं द्वारा किया जाता  है । तूमैन भी एक प्रसिद्व ऐतिहासिक तीर्थ क्षेत्र है,  जो कि  त्रिवेणी में स्थित है, जो माता विन्ध्यावासिनी  मंदिर के लिये विख्यात है । अशोकनगर जिले में कई धार्मिक महत्व के स्थान है ।

चंदेरी जो कि अशोकनगर जिले की एक तहसील है,  में विश्व  विख्यात  ऐतिहासिक एवं पर्यटक स्थल हैा चंदेरी के लोगों का मुख्य व्यवसाय  हस्तकला हैा चंदेरी साडि‍याँ  दुनिया भर में प्रसिद्व है, यह साडि‍याँ  खटका के द्वारा हाथ से कपास एवं रेशम से बनाई जाती हैा खटका एक स्व-निर्मित साडी तैयार करने की मशीन  है ।

अशोकनगर जिले में एक अन्य प्रसिद्व  स्थान  श्री आनंदपुर है, जो कि श्री अदवैथ परमहंस संप्रदाय का वैश्विक मुख्यालय है । दुनिया भर से साल में दो बार बैशाखी एवं गुरू पूर्णिमा  के दौरान उनके शिष्य अपने गुरू से आशीर्वाद लेने आनंदपुर की यात्रा  पर  आते है । अशोकनगर जिले का एक छोटा सा गाँव कदवाया  भी प्राचीन शिव मंदिर, गढी और बीजासन माता मंदिर के लिये प्रसिद्व है ।