इतिहास

वर्तमान अशोकनगर जिले का क्षेत्र महाभारत काल मे शिशुपाल के चेदि राज्य का भाग था एवं जनपद काल मे चेदि जनपद था मध्ययुगीन काल में चंदेरी राज्य का भाग था. छटवीं शताब्दी ई. पूर्व में चंदेरी क्षेत्र (अशोकनगर जिला का क्षेत्र ) अवंती, दर्शाण एवं चेदि जनपदो मे आता था । जो कि नन्द, मौर्य, शुंग एवं मगध राज्यो का भाग रहा था । यह माना जाता है कि महान सम्राट अशोक, उज्जैन को जीतकर जाते समय एक रात क्षेत्र मे रुके थे इसलिए इस क्षेत्र का नाम अशोकनगर पड़ा । नागा राजवंश मगध शुंग एवं शको का शासन पूर्ण होने के पश्चात, गुप्त एवं मौखारी के शासन के बाद यह हर्षवर्धन सम्राज्य का भाग बना । 8 – 9 वीं शताब्दी ई. में यह प्रतिहार राजपूत वंश के अधीन हो गया । प्रतिहार राजवंश के 7 वे वंशज राजा कीर्तिपाल ने 10वी-11वीं शताब्दी ई. मे चंदेरी शहर की स्थापना की एवं अपनी राज्य की राजधानी बनाया । प्रतिहार राजवंश के समाप्त होने के बाद जेजाक भुकटी चंदेल ने भी यहाँ संक्षेप में शासन कि‍या। चंदेरी राज्‍य 11वीं शताब्दी ई. में महमूद गजनवी के हमलों से बार बार प्रभावि‍त हुआ। दिल्ली सल्तनत की स्थपना के बाद तुर्क अफगान और मुगलों ने यहाँ शासन कि‍या । चंदेरी बुंदेला शासक मोरप्रहलाद के शासन काल के दौरान ग्वालियर के शासक दौलत राव सिंधिया ने चंदेरी पर हमला करने के लि‍ए जनरल जॉन बैप्टिस्ट को भेजा था । उसने चंदेरी, ईसागढ और आसपास के इलाकों पर कब्जा कर लि‍या । चंदेरी के अंति‍म बुंदेला शासक राजा मर्दन सि‍ह ने सन् 1857-58 ई. में एक स्वतंत्रता सैनानी के रूप में सर्वोच्य बलि‍दान दि‍या ।